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शनिवार, 4 जुलाई 2009

नट

वो हम जैसा दिखता है
पर हम जैसा है नही
हम चलते है जमीन पर
बात करते है आसमान की
वो चलता है रस्सी पर
बात करता है
सिर्फ़ पेट की
दिखाता है करतब
अजब अनोखे अनूठे
और एक पहिये की साइकिल
रस्सी पर चलाता हुआ
अपने आस पास जुटी भीड़ से
पूछता है एक ही सवाल
मुकाबला करोगे
मेरे बैलेंस का
अपने बैंक बैलेंस से
मेरा बैलेंस मेरी मजबूरी है
मेरी रोज़ी रोटी है
तुम्हारा बैलेंस ?
तुम्हारा स्टेटस सिम्बल !

13 टिप्‍पणियां:

नीरज शर्मा ने कहा…

सुन्‍दर। एक प्रशासनिक अधिकारी के मन में संवेदनाऍं है। जानकर सुखद लगा। शुभकामनाएँ।

Sanjeet Tripathi ने कहा…

प्रभावी।

शुभकामनाओं के साथ स्वागत है हिंदी ब्लॉग जगत पर।

दिगम्बर नासवा ने कहा…

man ke bhaavon को लाजवाब tarike se kaagaz par utaara hai aapne..............
pet की majboori kaa balance sach में bahot duk detaa hai

श्याम सखा 'श्याम' ने कहा…

ब्लॉग जगत पर स्वागत है
अच्छा लगा आपका यह अन्दाज
श्याम सखा‘श्याम’
्सं-मसि-कागद

समय ने कहा…

मुआफ़ी की गुजारिश पहले।
उसके बाद बंदा यह कहना चाहता है फिलहाल कि आपके वज़्नदार तआरूफ़ के आगे यह कविता ज्यादा छूने वाली नहीं लगी।

यह सनद रहे कि नाचीज़ ने कविता का जिक्र किया है। बात में आपकी दम अपनी जगह है ही, उसी ने यह लिखने की प्रेरणा दी है।

उम्मीद है धीरे-धीरे आपका बेहतर सामने आएगा।

नारदमुनि ने कहा…

nice.narayan narayan

बेनामी ने कहा…

सुन्‍दर। शुभकामनाएँ।

राजेंद्र माहेश्वरी ने कहा…

हिंदी भाषा को इन्टरनेट जगत मे लोकप्रिय करने के लिए आपका साधुवाद |

नमिता राकेश ने कहा…

नीरज जी ,
आपकी टिपण्णी के लिए शुक्रिया .वैसे प्रशासनिक अधिकारी एक कवि हो सकता है ओउर एक कविएक प्रशासनिक अधिकारी हो सकता है,क्यों कि मूल रूप से एक संवेदन शील दिल में कविता ऐसे ही होती है जैसे चन्दन में शीतलता .सो आप बिना ताजुब्ब के कविता और ग़ज़ल का आनंद लीजिये .अगली चिठ्ठी का इंतजार रहेगा आप www.voiceoffaridabad .com पर poetryoffaridabad पेज क्लिक करेंगे तो कुछ और शेर पढने क बजाय सुन भी सकेंगे
नमिता राकेश

नमिता राकेश ने कहा…

श्याम सखा जी
नमस्कार .
मेरे ब्लॉग पर आने के लिए शुक्रिया. आपको पढ़ती रहती हूँ .दो नई पोस्ट पर आपकी राय का स्वागत है .
नमिता राकेश

नमिता राकेश ने कहा…

उपर्युक्त आप सभी को
अभी नया नया लिखना सीखा है ब्लॉग पर सो एक साथ सभी को लिख रही हूँ धन्यवाद स्वरुप ..टाइपिंग नहीं आती है मुझे .एक मित्र श्री देवमणि पांडये जी के इ मेल के ज़रिये और अपने पुत्र उत्कर्ष की मदद से ये संभव हो पाया है .सच ,बड़ा अच्छा लग रहा है अपनी उँगलियों के मात्र हलके से दवाब से अक्षरों का मेरे सामने emerge होना .खासकर आप सभी से संपर्क होना i
नमिता राकेश

बेनामी ने कहा…

MANVIYA SAMVEDNA UBHARTI EK,SUNER ABHVYAKTI,HUM JAISA DIKHTA HEY. HUM JAISA HEY NAHIN , SHUBHKAMNAYE...

मोहिन्दर कुमार ने कहा…

नमस्कार नमिता जी,

आप से बात करके आपके ब्लोग का पता चला... सुन्दर ब्लोग है साथ ही सुन्दर सुन्दर रचनायें भी पढने को मिली... अब अक्सर यहां आवाजाही रहेगी